सृष्टि में दैत्यों का आतंक का अंत करने मां जगदंबा लेती है अवतार- युवराज पांडे
सृष्टि में दैत्यों का आतंक का अंत करने मां जगदंबा लेती है अवतार- युवराज पांडे
निमोरा में देवी भागवत कथा
छत्तीसगढ़ संवाददाता
अभनपुर, 21 फरवरी। अभनपुर क्षेत्र के समीपस्थ ग्राम निमोरा में 15 से 23 फरवरी तक देवी भागवत पुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथावाचन गरियाबंद के पं. युवराज पांडे द्वारा किया जा रहा है।
कथा के षष्ठम दिवस पर कथावाचक ने महाभारत प्रसंग का उल्लेख करते हुए भीष्म पितामह और अर्जुन के बीच हुए युद्ध का वर्णन किया। इसके साथ ही उन्होंने देवी की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब-जब सृष्टि पर संकट आता है, तब मां जगदंबा विभिन्न रूपों में अवतार लेकर रक्षा करती हैं।
कथावाचन के दौरान भ्रमरांबा देवी के स्वरूप का उल्लेख करते हुए बताया गया कि दुर्गम दैत्य के अत्याचार से देवताओं में भय का वातावरण उत्पन्न हो गया था। दैत्य ने कठोर तपस्या कर ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया और तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया। तब देवताओं ने मां जगदंबा का आवाहन किया। कथा के अनुसार, देवी ने भ्रमर (भौंरे) का रूप धारण कर दुर्गम दैत्य का संहार किया और देवताओं को संकट से मुक्ति दिलाई।
पंडित युवराज पांडे ने कहा कि मां जगत जननी हैं, संतान कुपुत्र हो सकती है, पर माता कुमाता नहीं होती। उन्होंने श्रद्धालुओं से आस्था और सदाचार के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
कथा में प्रतिदिन ग्रामीणों की उपस्थिति देखी जा रही है और आयोजन स्थल पर धार्मिक वातावरण बना हुआ है। कार्यक्रम का समापन 23 फरवरी को होगा।
निमोरा में देवी भागवत कथा
छत्तीसगढ़ संवाददाता
अभनपुर, 21 फरवरी। अभनपुर क्षेत्र के समीपस्थ ग्राम निमोरा में 15 से 23 फरवरी तक देवी भागवत पुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथावाचन गरियाबंद के पं. युवराज पांडे द्वारा किया जा रहा है।
कथा के षष्ठम दिवस पर कथावाचक ने महाभारत प्रसंग का उल्लेख करते हुए भीष्म पितामह और अर्जुन के बीच हुए युद्ध का वर्णन किया। इसके साथ ही उन्होंने देवी की महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जब-जब सृष्टि पर संकट आता है, तब मां जगदंबा विभिन्न रूपों में अवतार लेकर रक्षा करती हैं।
कथावाचन के दौरान भ्रमरांबा देवी के स्वरूप का उल्लेख करते हुए बताया गया कि दुर्गम दैत्य के अत्याचार से देवताओं में भय का वातावरण उत्पन्न हो गया था। दैत्य ने कठोर तपस्या कर ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया और तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया। तब देवताओं ने मां जगदंबा का आवाहन किया। कथा के अनुसार, देवी ने भ्रमर (भौंरे) का रूप धारण कर दुर्गम दैत्य का संहार किया और देवताओं को संकट से मुक्ति दिलाई।
पंडित युवराज पांडे ने कहा कि मां जगत जननी हैं, संतान कुपुत्र हो सकती है, पर माता कुमाता नहीं होती। उन्होंने श्रद्धालुओं से आस्था और सदाचार के मार्ग पर चलने का आह्वान किया।
कथा में प्रतिदिन ग्रामीणों की उपस्थिति देखी जा रही है और आयोजन स्थल पर धार्मिक वातावरण बना हुआ है। कार्यक्रम का समापन 23 फरवरी को होगा।