दिगंबर जैन मुनि 30 घंटे बाद मिले:45 डिग्री गर्मी में भटके, आहार मिलने पर श्रावकों के छलक पड़े आंसू
दिगंबर जैन मुनि 30 घंटे बाद मिले:45 डिग्री गर्मी में भटके, आहार मिलने पर श्रावकों के छलक पड़े आंसू
बड़वानी के आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक दिगंबर जैन मुनि के भटकने का मामला सामने आया है। उचित व्यवस्था न मिलने और गलत जानकारी के कारण मुनि विडंबर सागर महाराज को भीषण गर्मी में 30 घंटे तक बिना आहार और जल के रहना पड़ा। पुलिस और समाजजनों की तलाश के बाद उन्हें सकुशल खोज निकाला गया। लगभग 30 घंटे बाद जब मुनि महाराज को आहार और जल मिला, तो वहां मौजूद श्रावकों की आंखों से आंसू छलक पड़े। यह घटना मानव संवेदनाओं को झकझोर देने वाली थी, जहां 45 डिग्री सेल्सियस के भीषण तापमान के बीच मुनि महाराज को जंगल और सुनसान क्षेत्र में रात बितानी पड़ी। वे लगातार विहार करते रहे और इस दौरान उन्हें न तो भोजन मिला और न ही पानी। सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम सुराणा ने बताया कि दिगंबर जैन मुनि विडंबर सागर महाराज 20 मई को महाराष्ट्र के शिरपुर से मध्य प्रदेश की सीमा में प्रवेश कर बड़वानी जिले के गवाड़ी पहुंचे थे। उसी दिन उन्होंने विहार करते हुए सेंधवा के आगे गोई गांव में रात्रि विश्राम किया। जुलवानिया से आगे निकल मुनि अगले दिन, 21 मई को, मुनि महाराज ने लगभग 15 किलोमीटर का विहार किया, जहां सेंधवा निवासी योगेश जैन और अशोक जैन ने उन्हें आहार कराया। इसके बाद वे जुलवानिया की ओर बढ़े। जुलवानिया से उन्हें खरगोन जिले के उन थाना क्षेत्र के सेगांव जाने का मार्ग बताया गया। इसी दौरान, रात्रि विश्राम की व्यवस्था के लिए एक व्यक्ति स्थानक की सफाई करने चला गया, यह सोचकर कि मुनि महाराज थोड़ी देर में वहां पहुंच जाएंगे। हालांकि, स्थान की सही जानकारी न होने के कारण मुनि महाराज आगे निकल गए और आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर बढ़ते चले गए। रात होने पर कोई सुरक्षित स्थान न मिलने के कारण उन्होंने एक ढाबे के पास बगीचे में ही विश्राम किया। अगले दिन सुबह करीब 11 बजे वे फिर तपती धूप में बिना जल और आहार लिए आगे विहार करते रहे। जब काफी समय तक उनका पता नहीं चला, तो दिगंबर समाज के लोगों ने खोजबीन शुरू की। पुलिस प्रशासन भी तलाश में जुटा सूचना मिलने पर जुलवानिया थाना प्रभारी सौरव बाथम सक्रिय हुए। पुलिस अधीक्षक पद्मविलोचन शुक्ला ने भी तुरंत मोर्चा संभालते हुए जुलवानिया और ठीकरी थाना क्षेत्र की पुलिस टीमों को खोज अभियान में लगाया। बड़वानी से बावन गजा ट्रस्ट के मैनेजर इंद्रजीत मंडलोई और अंजड़ के धर्मेंद्र जैन भी अपने साथियों के साथ तलाश में जुट गए। करीब 6 घंटे की लगातार खोज के बाद मुनि महाराज ठान फाटे के पास एक पुल के नीचे बैठे मिले। इस प्रकार, लगभग 30 घंटे की कठिन परिस्थितियों के बाद उन्हें सुरक्षित ढूंढ लिया गया और आहार-जल ग्रहण करने पर सभी की भावनाएं उमड़ पड़ीं। मुनि महाराज के सुरक्षित मिलने पर समाजजनों और पुलिसकर्मियों ने राहत की सांस ली। उन्हें तुरंत एक वृक्ष की छांव में बैठाया गया। इस दौरान खरगोन जिले के उन और सेगांव से पहुंचे समाजजनों ने उनके आहार और जल की व्यवस्था की। इंद्रजीत मंडलोई और धर्मेंद्र जैन ने बताया कि भूखे-प्यासे, तपती लू में अकेले विहार करते मुनि महाराज की स्थिति देखकर सभी भाव-विभोर हो उठे। पश्चाताप और ग्लानि से कई लोगों की आंखों से अश्रुधारा बह निकली। आज भी पुल के नीचे बिताएं रात समाजजनों ने इस पूरी घटना को बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि मिसकम्युनिकेशन और मिसमैनेजमेंट के कारण दिगंबर जैन मुनि को इतना कष्ट सहना पड़ा। उन्होंने आज की रात भी लोनारा के आशीष व अन्य श्रावकों के साथ आगे एक पुल के नीचे बिताने का फैसला किया, अब वे आज शनिवार शाम को ठीकरी होते हुए धार जिले के धामनोद पहुंचेंगे। अब दिगंबर जैन कमेटी ऐसी व्यवस्था बनाने की तैयारी कर रही है, जिससे आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले मुनि महाराजों के विहार, आहार चर्या और रात्रि विश्राम की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
बड़वानी के आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर एक दिगंबर जैन मुनि के भटकने का मामला सामने आया है। उचित व्यवस्था न मिलने और गलत जानकारी के कारण मुनि विडंबर सागर महाराज को भीषण गर्मी में 30 घंटे तक बिना आहार और जल के रहना पड़ा। पुलिस और समाजजनों की तलाश के बाद उन्हें सकुशल खोज निकाला गया। लगभग 30 घंटे बाद जब मुनि महाराज को आहार और जल मिला, तो वहां मौजूद श्रावकों की आंखों से आंसू छलक पड़े। यह घटना मानव संवेदनाओं को झकझोर देने वाली थी, जहां 45 डिग्री सेल्सियस के भीषण तापमान के बीच मुनि महाराज को जंगल और सुनसान क्षेत्र में रात बितानी पड़ी। वे लगातार विहार करते रहे और इस दौरान उन्हें न तो भोजन मिला और न ही पानी। सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम सुराणा ने बताया कि दिगंबर जैन मुनि विडंबर सागर महाराज 20 मई को महाराष्ट्र के शिरपुर से मध्य प्रदेश की सीमा में प्रवेश कर बड़वानी जिले के गवाड़ी पहुंचे थे। उसी दिन उन्होंने विहार करते हुए सेंधवा के आगे गोई गांव में रात्रि विश्राम किया। जुलवानिया से आगे निकल मुनि अगले दिन, 21 मई को, मुनि महाराज ने लगभग 15 किलोमीटर का विहार किया, जहां सेंधवा निवासी योगेश जैन और अशोक जैन ने उन्हें आहार कराया। इसके बाद वे जुलवानिया की ओर बढ़े। जुलवानिया से उन्हें खरगोन जिले के उन थाना क्षेत्र के सेगांव जाने का मार्ग बताया गया। इसी दौरान, रात्रि विश्राम की व्यवस्था के लिए एक व्यक्ति स्थानक की सफाई करने चला गया, यह सोचकर कि मुनि महाराज थोड़ी देर में वहां पहुंच जाएंगे। हालांकि, स्थान की सही जानकारी न होने के कारण मुनि महाराज आगे निकल गए और आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग पर बढ़ते चले गए। रात होने पर कोई सुरक्षित स्थान न मिलने के कारण उन्होंने एक ढाबे के पास बगीचे में ही विश्राम किया। अगले दिन सुबह करीब 11 बजे वे फिर तपती धूप में बिना जल और आहार लिए आगे विहार करते रहे। जब काफी समय तक उनका पता नहीं चला, तो दिगंबर समाज के लोगों ने खोजबीन शुरू की। पुलिस प्रशासन भी तलाश में जुटा सूचना मिलने पर जुलवानिया थाना प्रभारी सौरव बाथम सक्रिय हुए। पुलिस अधीक्षक पद्मविलोचन शुक्ला ने भी तुरंत मोर्चा संभालते हुए जुलवानिया और ठीकरी थाना क्षेत्र की पुलिस टीमों को खोज अभियान में लगाया। बड़वानी से बावन गजा ट्रस्ट के मैनेजर इंद्रजीत मंडलोई और अंजड़ के धर्मेंद्र जैन भी अपने साथियों के साथ तलाश में जुट गए। करीब 6 घंटे की लगातार खोज के बाद मुनि महाराज ठान फाटे के पास एक पुल के नीचे बैठे मिले। इस प्रकार, लगभग 30 घंटे की कठिन परिस्थितियों के बाद उन्हें सुरक्षित ढूंढ लिया गया और आहार-जल ग्रहण करने पर सभी की भावनाएं उमड़ पड़ीं। मुनि महाराज के सुरक्षित मिलने पर समाजजनों और पुलिसकर्मियों ने राहत की सांस ली। उन्हें तुरंत एक वृक्ष की छांव में बैठाया गया। इस दौरान खरगोन जिले के उन और सेगांव से पहुंचे समाजजनों ने उनके आहार और जल की व्यवस्था की। इंद्रजीत मंडलोई और धर्मेंद्र जैन ने बताया कि भूखे-प्यासे, तपती लू में अकेले विहार करते मुनि महाराज की स्थिति देखकर सभी भाव-विभोर हो उठे। पश्चाताप और ग्लानि से कई लोगों की आंखों से अश्रुधारा बह निकली। आज भी पुल के नीचे बिताएं रात समाजजनों ने इस पूरी घटना को बेहद दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि मिसकम्युनिकेशन और मिसमैनेजमेंट के कारण दिगंबर जैन मुनि को इतना कष्ट सहना पड़ा। उन्होंने आज की रात भी लोनारा के आशीष व अन्य श्रावकों के साथ आगे एक पुल के नीचे बिताने का फैसला किया, अब वे आज शनिवार शाम को ठीकरी होते हुए धार जिले के धामनोद पहुंचेंगे। अब दिगंबर जैन कमेटी ऐसी व्यवस्था बनाने की तैयारी कर रही है, जिससे आगरा-मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाले मुनि महाराजों के विहार, आहार चर्या और रात्रि विश्राम की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।