भोपाल से ले जाकर मासूम को श्योपुर में छोड़ा:श्योपुर पुलिस दंपति को ले गई साथ, केयर टेकर बोली- बच्ची को बेरहमी से पीटते थे

राजधानी भोपाल की एक दंपति ने एक ढाई साल की मासूम बच्ची को श्योपुर के पास छोड़कर भाग गई। घटना 18 अप्रैल की है, लेकिन गुरुवार को श्योपुर पुलिस भोपाल आई और दंपति को गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई। श्योपुर के टोंक-चिरगांव नेशनल हाइवे पर सोंईकलां के पास एक ढाई साल की बच्ची लावारिस हालत में मिली थी। कम उम्र के कारण बच्ची अपने घर का पता या माता-पिता का नाम नहीं बता पाई। पुलिस ने बच्ची को सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेश किया, जिसके बाद उसे 'वन स्टॉप सेंटर' भेजा गया है। स्थानीय लोगों ने भी सोशल मीडिया पर बच्ची की पहचान के लिए कैंपेन शुरू किया था। सोशल मीडिया पर बच्ची की तस्वीरें देखने के बाद भोपाल की एक महिला ने श्योपुर संपर्क किया। दावा किया कि वह बच्ची की केयर टेकर रही है। भोपाल के एयरपोर्ट रोड में रहने वाले आकाश और कृतिका नाम के दंपति ने इस बच्ची को एडॉप्ट किया था। बच्ची को जमकर मारा और पीटा जाता था। कॉल करने वाली महिला ने स्वयं को भोपाल के लालघाटी का होना बताया था। महिला के दावों की तस्दीक के बाद श्योपुर के मानपुर थाने की पुलिस भोपाल पहुंची। बच्ची को फेंकने के लिए दंपति भोपाल से श्योपुर तक चार सौ किलोमीटर का सफर तय कर पहुंचे थे। केयर टेकर बोली - आकाश बच्ची को पीटता था बच्ची की केयर टेकर बबीता ने बताया कि उन्होंने तीन महीने तक बच्ची को संभाला है। तस्वीर से उसकी पहचान करने के बाद उन्होंने ही श्योपुर पुलिस को सूचना दी। एयपोर्ट रोड आसाराम चौराहा पर स्थित सेवा सदन के करीब कॉलोनी में रहने वाले आकाश के घर तक पुलिस को वह लेकर पहुंची थीं। वहां से पुलिस ने आकाश और उसकी पत्नी कृतिका को हिरासत में लिया। दोनों को पुलिस साथ ले गई है। आकाश ने स्वीकार किया है कि बच्ची को उसी ने श्योपुर में छोड़ा था। बबीता का दावा है कि बच्ची को तीन महीने की थी तब आकाश और कृतिका लेकर आए थे। कहां से लाए, कैसे लाए, किसी को नहीं बताया। जबकि दोनों के पास पहले ही दो बच्चे थे। यह लोग बच्ची को मारते और पीटते थे। बच्चों की देखरेख के लिए उन्हें बीस हजार रुपए महीने की सैलेरी पर रखा गया था। तीन महीने काम करने के बाद भी बबीता को सैलेरी नहीं मिली तो उसने काम छोड़ दिया। वह उसकी विशेष देखरेख करती थी। मानव तस्करी के एंगल पर भी पुलिस की जांच श्योपुर पुलिस मामले में मानव तस्करी एंगल पर भी जांच कर रही है। दंपति के पास पहले से मौजूद बच्चों के संबंध में भी पुलिस पूछताछ कर रही है। आरोपी बच्चों को कहां से और कैसे लाए। क्या बच्ची की खरीद फरोख्त की गई है, इस संबंध में पुलिस दंपति से पूछताछ कर रही है। ईंट-भट्टा मजदूर ने पुलिस को दी सूचना मानपुर थाना प्रभारी सतीश कुमार दुबे ने बताया कि सोंईकलां के पास एक ईंट भट्टे पर काम करने वाले मजदूर ने बच्ची को हाइवे पर अकेले घूमते देखा था। मजदूर की सूचना पर तत्काल डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची और बच्ची को अपनी सुरक्षा में लिया। परिजन की तलाश में जुटी टीम आसपास के थानों में दर्ज गुमशुदगी के मामलों से बच्ची का मिलान किया जा रहा है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर अपील की है कि यदि किसी को भी बच्ची के परिजनों के बारे में जानकारी मिले, तो वे तुरंत मानपुर पुलिस को सूचित करें।

भोपाल से ले जाकर मासूम को श्योपुर में छोड़ा:श्योपुर पुलिस दंपति को ले गई साथ, केयर टेकर बोली- बच्ची को बेरहमी से पीटते थे
राजधानी भोपाल की एक दंपति ने एक ढाई साल की मासूम बच्ची को श्योपुर के पास छोड़कर भाग गई। घटना 18 अप्रैल की है, लेकिन गुरुवार को श्योपुर पुलिस भोपाल आई और दंपति को गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई। श्योपुर के टोंक-चिरगांव नेशनल हाइवे पर सोंईकलां के पास एक ढाई साल की बच्ची लावारिस हालत में मिली थी। कम उम्र के कारण बच्ची अपने घर का पता या माता-पिता का नाम नहीं बता पाई। पुलिस ने बच्ची को सीडब्ल्यूसी के समक्ष पेश किया, जिसके बाद उसे 'वन स्टॉप सेंटर' भेजा गया है। स्थानीय लोगों ने भी सोशल मीडिया पर बच्ची की पहचान के लिए कैंपेन शुरू किया था। सोशल मीडिया पर बच्ची की तस्वीरें देखने के बाद भोपाल की एक महिला ने श्योपुर संपर्क किया। दावा किया कि वह बच्ची की केयर टेकर रही है। भोपाल के एयरपोर्ट रोड में रहने वाले आकाश और कृतिका नाम के दंपति ने इस बच्ची को एडॉप्ट किया था। बच्ची को जमकर मारा और पीटा जाता था। कॉल करने वाली महिला ने स्वयं को भोपाल के लालघाटी का होना बताया था। महिला के दावों की तस्दीक के बाद श्योपुर के मानपुर थाने की पुलिस भोपाल पहुंची। बच्ची को फेंकने के लिए दंपति भोपाल से श्योपुर तक चार सौ किलोमीटर का सफर तय कर पहुंचे थे। केयर टेकर बोली - आकाश बच्ची को पीटता था बच्ची की केयर टेकर बबीता ने बताया कि उन्होंने तीन महीने तक बच्ची को संभाला है। तस्वीर से उसकी पहचान करने के बाद उन्होंने ही श्योपुर पुलिस को सूचना दी। एयपोर्ट रोड आसाराम चौराहा पर स्थित सेवा सदन के करीब कॉलोनी में रहने वाले आकाश के घर तक पुलिस को वह लेकर पहुंची थीं। वहां से पुलिस ने आकाश और उसकी पत्नी कृतिका को हिरासत में लिया। दोनों को पुलिस साथ ले गई है। आकाश ने स्वीकार किया है कि बच्ची को उसी ने श्योपुर में छोड़ा था। बबीता का दावा है कि बच्ची को तीन महीने की थी तब आकाश और कृतिका लेकर आए थे। कहां से लाए, कैसे लाए, किसी को नहीं बताया। जबकि दोनों के पास पहले ही दो बच्चे थे। यह लोग बच्ची को मारते और पीटते थे। बच्चों की देखरेख के लिए उन्हें बीस हजार रुपए महीने की सैलेरी पर रखा गया था। तीन महीने काम करने के बाद भी बबीता को सैलेरी नहीं मिली तो उसने काम छोड़ दिया। वह उसकी विशेष देखरेख करती थी। मानव तस्करी के एंगल पर भी पुलिस की जांच श्योपुर पुलिस मामले में मानव तस्करी एंगल पर भी जांच कर रही है। दंपति के पास पहले से मौजूद बच्चों के संबंध में भी पुलिस पूछताछ कर रही है। आरोपी बच्चों को कहां से और कैसे लाए। क्या बच्ची की खरीद फरोख्त की गई है, इस संबंध में पुलिस दंपति से पूछताछ कर रही है। ईंट-भट्टा मजदूर ने पुलिस को दी सूचना मानपुर थाना प्रभारी सतीश कुमार दुबे ने बताया कि सोंईकलां के पास एक ईंट भट्टे पर काम करने वाले मजदूर ने बच्ची को हाइवे पर अकेले घूमते देखा था। मजदूर की सूचना पर तत्काल डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची और बच्ची को अपनी सुरक्षा में लिया। परिजन की तलाश में जुटी टीम आसपास के थानों में दर्ज गुमशुदगी के मामलों से बच्ची का मिलान किया जा रहा है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर अपील की है कि यदि किसी को भी बच्ची के परिजनों के बारे में जानकारी मिले, तो वे तुरंत मानपुर पुलिस को सूचित करें।